सोमवार 26 जनवरी को देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 1950 से इसी दिन देश में संविधान लागू हुआ था। संविधान निर्माता समिति का इंदौर से गहरा नाता रहा है।  देश में किस प्रकार के मौलिक अधिकारों का प्रावधान किया जाए, इसके लिए जून 1947 में एक समिति बनी थी। इसमें 299 सदस्य नामित किए गए थे। इस समिति में इंदौर समेत मध्य भारत के 19 के नागरिक सदस्य के रूप में सम्मिलित थे।

देश के पहले कानून एवं न्याय मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर को संविधान की मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में इंदौर के निकट महू में हुआ था, प्रतिवर्ष उनके जन्मदिन पर महू में भव्य कार्यक्रम आयोजित होता है और उनके अनुयायी एकत्र होकर उन्हें स्मरण करते हैं।

संविधान निर्माण समिति के सदस्य

संविधान निर्माण के लिए बनाई गई समिति में मध्य भारत और संयुक्त प्रदेश से मध्य प्रांत के प्रतिनिधि के रूप में इंदौर से विनायक सीताराम सरवटे और झाबुआ थांदला से कुसुमकांत जैन थे। थांदला में जन्मे कुसुमकांत जैन सबसे कम उम्र के सदस्य थे। कुसुमकांत जैन काफी समय तक इंदौर में रहे। 23 जुलाई 1921 को जन्मे जैन ने 15 साल की उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। जैन प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक मामा बालेश्वर दयाल को अपना गुरु मानते थे। जैन आजादी के बाद झाबुआ स्टेट में मंत्री, मध्य भारत यूनियन में कैबिनेट मंत्री, भारतीय संविधान निर्मात्री परिषद के सदस्य  मध्य भारत विधानसभा सदस्य सहित कई पदों पर रहे। 2013 को उनका इंदौर में निधन हो गया।

अच्छे कानूनविद थे विनायक सीताराम सरवटे

विनायक सीताराम सरवटे का जन्म अप्रैल 1884 में इंदौर में हुआ था। आपने कानून की पढ़ाई की थी और एक अच्छे कानूनविद थे। इंदौर के प्रसिद्ध बस स्टैंड का नामकरण आपके नाम से किया गया। उन्हें 1966 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। नगर की प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री शालिनी ताई मोघे आपकी बेटी थी। 1972 में सरवटे का निधन हो गया था। 

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संविधान के पेजों के चित्रकार इंदौर के थे

संविधान का प्रथम पेज, जिसमें राष्ट्रीय चिन्ह अशोक, सिंह  और अन्य मनोहर चित्रों का चित्रांकन करने वाले पंडित दीनानाथ भार्गव थे। आपका जन्म बैतूल में हुआ था, पर उनका परिवार इंदौर में ही रहने लगा था। दीनानाथ भार्गव को संविधान के पृष्ठों के चित्र तैयार करने के लिए प्रसिद्ध चित्रकार और प्रसिद्ध कलाकर्मी नंदलाल बोस ने भार्गव का चयन किया था। उस वक्त दीनानाथ भार्गव की उम्र 20 वर्ष थी और वे शांति निकेतन कलकत्ता के फाइन आर्ट कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। दिसंबर 2016 में दीनानाथ भार्गव का इंदौर में निधन हो गया। उनका परिवार वर्तमान में इंदौर में रहता है। इंदौर के दीनानाथ भार्गव संविधान के पृष्ठों के चितेरे थे।

इंदौर में होता है भव्य कार्यक्रम 

26 जनवरी 1950 को देश के पूर्ण गणतंत्र की घोषणा प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने ध्वजारोहण कर की थी और देश का संविधान लागू हुआ था। इस दिन देश भर में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इंदौर में राजवाड़े पर 1950 में गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण किया गया था। स्कूली छात्रों की रैली और किला मैदान स्थित किले में भव्य परेड का आयोजन होता था। 1963 तक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की परेड किला मैदान में आयोजित होती रही। नेहरू स्टेडियम के निर्माण के बाद 1964 से परेड स्टेडियम में आयोजित होने लगी, जो आज तक जारी है।



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