मध्य प्रदेश में ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में चर्म रोग विभाग में रोजाना औसतन तीन से चार हर्पीज जोस्टर के मरीज पहुंच रहे हैं। बीते दो माह में ही करी …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 26 Jan 2026 10:02:55 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Jan 2026 10:10:25 AM (IST)

कमजोर इम्युनिटी पर हावी हो रहा हर्पीज जोस्टर, कोरोना से रिकवर मरीज भी चपेट में
ग्वालियर के अस्पताल में रोजाना इसके मरीज पहुंच रहे हैं। – प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. हर्पीज जोस्टर का वायरस शरीर में पहले से मौजूद रहता है
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर यह सक्रिय हो जाता है
  3. नसों के जरिए त्वचा तक पहुंचकर यह संक्रमण फैलता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जयारोग्य अस्पताल में हर्पीज जोस्टर के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वेरिसेला जोस्टर वायरस से फैलने वाला यह संक्रमण अब सिर्फ डायबिटीज, कैंसर या कीमोथैरेपी कराने वाले मरीजों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कोरोना संक्रमण से रिकवर हो चुके मरीज भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इनमें युवा, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग तक शामिल हैं।

जेएएच के चर्म रोग विभाग में रोजाना औसतन तीन से चार हर्पीज जोस्टर के मरीज पहुंच रहे हैं। बीते दो माह में ही करीब 240 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनकी इम्युनिटी कमजोर पाई गई है।

चिकित्सकों के अनुसार हर्पीज जोस्टर का वायरस शरीर में पहले से मौजूद रहता है, लेकिन यह सुसुप्त अवस्था में होता है। जैसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है, वायरस सक्रिय होकर नसों के जरिए त्वचा तक पहुंच जाता है और संक्रमण फैलने लगता है।

कोरोना के बाद बढ़ा खतरा

त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभव गर्ग का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बाद कई मरीजों की इम्युनिटी लंबे समय तक कमजोर बनी रहती है। इसी वजह से उनमें हर्पीज जोस्टर का खतरा बढ़ रहा है। शुरुआत में तेज दर्द, जलन और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ दिनों बाद उसी स्थान पर फफोले और दाने उभर आते हैं।

केस एक

छतरपुर निवासी 45 वर्षीय आकाश (बदला हुआ नाम) कोरोना संक्रमण के बाद कमजोरी से जूझ रहे थे। हाथों में तेज दर्द और बुखार को उन्होंने मामूली समझकर अनदेखा किया, लेकिन कुछ ही दिनों में बाएं हाथ में फफोले पड़ गए और जलन बढ़ने लगी। जेएएच के त्वचा रोग विभाग में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें हर्पीज जोस्टर बताया।

केस दो

ग्वालियर निवासी राकेश (बदला हुआ नाम) पहले से डायबिटीज और किडनी की समस्या से पीड़ित हैं। तेज बुखार और जलन को उन्होंने सामान्य बुखार समझकर निजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन दर्द बढ़ता गया। बाद में जेएएच पहुंचने पर डॉक्टरों ने लक्षणों के आधार पर हर्पीज जोस्टर की पुष्टि की।

यह जानना जरूरी

  • हर्पीज जोस्टर एक वायरल संक्रमण है, जो चिकनपाक्स के वायरस वेरिसेला जोस्टर से होता है।
  • शुरुआत में असहनीय दर्द होता है, फिर उसी स्थान पर दाने और फफोले निकलते हैं।
  • डायबिटीज, कैंसर, टीबी और एचआईवी मरीजों को अधिक खतरा रहता है।
  • वायरस शरीर में सूक्ष्म अवस्था में रहता है और इम्युनिटी कम होने पर प्रभावी हो जाता है।

मुख्य लक्षण

  • त्वचा पर लाल दाने और फफोले
  • मुंह, जीभ, गले, होंठ और मसूड़ों पर अल्सर
  • आंखों के आसपास फफोले, चेहरे पर दाग-धब्बे और जलन
  • शरीर में असामान्य दर्द, जलन या फफोले दिखाई देने पर लापरवाही न बरतें तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।



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