ग्वालियर उपभोक्ता आयोग ने एयर अरेबिया को सेवा में गंभीर कमी का दोषी माना। ट्रांजिट वीजा के नाम पर यात्री को यात्रा से रोका गया। आयोग ने एयरलाइन को एक …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 28 Jan 2026 08:32:06 AM (IST)Updated Date: Wed, 28 Jan 2026 08:32:06 AM (IST)

एयर अरेबिया ने ट्रांजिट वीजा को लेकर की मनमानी, अब उभोक्ता को देंने होंगे एक लाख
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने लगाया जुर्माना। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एयर अरेबिया पर सेवा में कमी का आरोप सिद्ध।
  2. ट्रांजिट वीजा के नाम पर यात्री को रोका गया।
  3. आयोग ने एक लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। विदेश यात्रा के दौरान यात्रियों से जुड़ी सुविधाओं में लापरवाही अब एयरलाइंस को महंगी पड़ने लगी है। ग्वालियर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक मामले में एयर अरेबिया को ट्रांजिट वीजा को लेकर मनमानी और सेवा में गंभीर कमी का दोषी माना है। इसके लिए आयोग ने कंपनी को परिवादी के लिए एक लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।

ये है पूरा मामला

प्रकरण में परिवादी ग्वालियर के थाटीपुर निवासी विवेक कुमार पांडेय के अनुसार, वह कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान की व्यापारिक यात्रा के बाद ताशकंद से शारजाह होते हुए नई दिल्ली लौट रहे थे। उन्होंने यात्रा के लिए एयर अरेबिया और इंडिगो एयरलाइंस की कन्फर्म टिकट पहले से बुक कर रखी थी। दोनों उड़ानों के बीच लेओवर समय 48 घंटे से कम था, ऐसे में यूएई इमिग्रेशन नियमों के तहत ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता नहीं थी। उसके बावजूद एयर अरेबिया के कर्मचारियों ने ताशकंद एयरपोर्ट पर बोर्डिंग पास देने से इन्कार कर दिया और ट्रांजिट वीजा नहीं होने का हवाला देकर यात्रा रोक दी।

विवशता में विवेक को दोबारा टिकट खरीदनी पड़ी, जिससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि मानसिक और शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। सेवा में की कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि एयर अरेबिया द्वारा ट्रांजिट वीजा संबंधी कोई ठोस नियम प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि ई-मेल साक्ष्य से स्पष्ट था कि ऐसी स्थिति में वीजा अनिवार्य नहीं था।

आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। आदेश में आयोग ने एयर अरेबिया को 45 दिनों के भीतर एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं। समयसीमा में भुगतान न होने पर राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।



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