मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्यमिता, नवाचार और व्यापार भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। प्राचीन काल से ही भारत व्यापार और व्यवसाय की गहरी समझ रखने वाला देश रहा है। युवा ही देश को नई सोच और नई दिशा देते हैं तथा उनके नवाचार विकास की मजबूत नींव बनते हैं। इसलिए नवाचारों को प्रोत्साहन देना राज्य सरकार का संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित दो दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट–2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई कार्यरत हैं, जो देश की जीडीपी में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं, जबकि कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्टार्ट-अप्स का योगदान अतुलनीय है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम बन चुका है और देश चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो गया है। 

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समिट के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 156 स्टार्ट-अप्स को 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि तथा मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 21 स्टार्ट-अप्स को 8.17 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। उन्होंने सफल और विकासशील स्टार्ट-अप्स के फाउंडर्स और इंक्यूबेटर्स को सम्मानित किया। इसके साथ ही एमएसएमई विभाग और चार प्रमुख संस्थाओं के बीच दीर्घकालिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के सफल स्टार्ट-अप्स पर आधारित एक बुकलेट का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के महान वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बोस के कार्यों को यदि उस समय समुचित पहचान मिलती, तो भारत नवाचार के क्षेत्र में और आगे होता। अब प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में देशभर में स्टार्ट-अप और रिसर्च को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है। मध्यप्रदेश में लागू स्टार्ट-अप नीतियों के चलते आज अकेले इंदौर में 2200 से अधिक स्टार्ट-अप कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार युवाओं द्वारा किए जा रहे नवाचारों को हरसंभव समर्थन दे रही है।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि युवा शक्ति के पास दुनिया बदलने की क्षमता है। स्टार्ट-अप नीति 2025 के तहत नए उद्यमियों को इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से प्रारंभिक सहायता दी जा रही है और राज्य सरकार हर नए विचार के साथ खड़ी है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि स्टार्ट-अप्स ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बना दिया है और भारत का स्टार्ट-अप इको-सिस्टम वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है। समिट के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्ट-अप प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन कर नवाचारों की सराहना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा उद्यमी, स्टार्ट-अप फाउंडर्स और इंक्यूबेटर्स उपस्थित रहे। मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट–2026 ने राज्य को नवाचार और उद्यमिता के एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में नया उत्साह और विश्वास पैदा किया।



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