डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को विधानसभा सत्र के दौरान वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मना रहे है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में पांच प्रमुख फसलों उड़द, सरसों, चना, मसूर और तुअर के लिए महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि किसानों का सशक्तिकरण प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ बनाना है, ताकि “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” का सपना साकार हो सके।

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मुख्यमंत्री ने सरसों को भावांतर योजना के दायरे में लाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सरसों के रकबे में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार उत्पादन 15.71 लाख मीट्रिक टन आंका गया है। जनवरी माह में सरसों की औसत मंडी दर 6000 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में भावांतर योजना के तहत पात्र किसानों को एमएसपी से कम मूल्य मिलने पर अंतर की प्रतिपूर्ति की जाएगी। इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उड़द की ग्रीष्मकालीन फसल पर किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। यह राशि न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दलहनी फसलों के संतुलित उत्पादन और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

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चना और मसूर के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए भी केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन तथा मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत 24 मार्च से 30 मई 2026 तक खरीदी अवधि प्रस्तावित है, जबकि किसानों का पंजीयन 20 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक किया जा रहा है। खरीफ फसल तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है, जिसे केंद्रीय एजेंसियों नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सिंचाई, बिजली, पानी और कृषि ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए किसानों को हरसंभव सहयोग दे रही है।



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