एथेनाल मिश्रित पेट्रोल पुराने इंजनों की तकनीक के लिए बहुत खतरनाक है। एथेनाल की वजह से रबर पाइप, सील, फ्यूल लाइन और कार्बोरेटर तेजी से खराब हो रहे हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 09 Feb 2026 12:51:47 PM (IST)Updated Date: Mon, 09 Feb 2026 01:03:24 PM (IST)

एथेनाल कर रहा इंजन को बीमार; गाड़‍ियां खुद पकड़ रही रफ्तार, तो कभी चलते हुए हो रही बंद
रिपेयरिंग की दुकान पर दो पहिया वाहनों को सुधारते मैकेनिक।

HighLights

  1. अब पेट्रोल पंपों पर बिक रहे ईंधन को लेकर लोगों में नाराजगी है
  2. कितनी मात्रा में एथेनाल मिलाया गया है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं
  3. कई लोग तो बार-बार वर्कशाप के चक्कर काटने को मजबूर हो गए हैं

हर्ष श्रीवास्तव, नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पेट्रोल में मिलाए जा रहे एथेनाल ने पुराने वाहनों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। खासकर पांच से दस साल पुराने दोपहिया और चारपहिया वाहन इस ईंधन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वाहन मालिकों का कहना है कि एथेनाल मिश्रित पेट्रोल भरवाने के बाद गाड़ियों की पिकअप कम हो गई है, माइलेज घट रहा है और कई मामलों में इंजन चलते-चलते बंद हो रहा है।

बता दें, कई पेट्रोल पंपों पर बिक रहे ईंधन को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। वाहन चालकों का आरोप है कि पेट्रोल में कितनी मात्रा में एथेनाल मिलाया गया है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी पंपों पर नहीं दी जा रही। अनजाने में लोग यह पेट्रोल भरवा रहे हैं और कुछ ही समय में उन्हें अपने वाहन मैकेनिक के पास ले जाने पड़ रहे हैं।

पुराने वाहनों के लिए एथेनाल मिश्रित पेट्रोल खतरनाक

मैकेनिकों के अनुसार, एथेनाल मिश्रित पेट्रोल पुराने इंजनों की तकनीक के लिए बहुत खतरनाक है। एथेनाल की वजह से रबर पाइप, सील, फ्यूल लाइन और कार्बोरेटर तेजी से खराब हो रहे हैं। कई वाहनों में फ्यूल सिस्टम जाम होने की समस्या सामने आ रही है, जिससे इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा एथेनाल नमी को आकर्षित करता है, जिससे इंजन के अंदर जंग लगने का खतरा भी बढ़ गया है।

इस संबंध में वाहन मालिकों का कहना है कि पहले जहां सालों तक कोई बड़ी परेशानी नहीं आती थी, अब तीन-चार महीने में ही हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। किसी की फ्यूल लाइन बदलनी पड़ रही है, तो किसी का कार्बोरेटर साफ कराना पड़ रहा है। कई लोग तो बार-बार वर्कशाप के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

यह होता है एथेनाल

एथेनॉल एक रंगहीन, ज्वलनशील और वाष्पशील कार्बनिक तरल है, जिसे इथाइल अल्कोहल भी कहा जाता है यह गन्ने, मक्का और अन्य फसलों से किण्वन द्वारा बनाया जाता है। यह एक नवीकरणीय जैव ईंधन है, जिसका उपयोग पेट्रोल के साथ मिलाकर प्रदूषण कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए किया जाता है।

एथेनाल से हो रही यह दिक्कतें

  1. इंजन का पिकअप कमजोर।
  2. माइलेज में कमी।
  3. बार-बार इंजन बंद होना।
  4. फ्यूल पाइप और सील खराब होना।
  5. कार्बोरेटर जाम होना।
  6. इंजन में जंग का खतरा बढ़ना।

सबसे ज्यादा प्रभावित यह वाहन

  1. पांच से 10 साल पुराने दोपहिया वाहन।
  2. पुराने माडल की कारें।
  3. कार्बोरेटर वाले वाहन।
  4. ज्यादा चले हुए इंजन।

पुराने वाहन मालिकों की मांग

  1. पुराने वाहनों के लिए अलग से पेट्रोल व्यवस्था हो।
  2. पेट्रोल पंपों पर एथेनाल की मात्रा की जानकारी दी जाए।
  3. ईंधन गुणवत्ता की नियमित जांच होना जरूरी।

पुरानी वाहनों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई

एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बताया जा रहा है, लेकिन पुराने वाहनों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। हमारी मांग है कि या तो पुराने वाहनों के लिए अलग पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए, या फिर पेट्रोल पंपों पर एथेनाल की मात्रा को लेकर स्पष्ट और अनिवार्य सूचना बोर्ड लगाए जाएं। – डॉ. अंकुर श्रीवास्तव, निवासी थाठीपुर

20 प्रतिशत एथेनाल मिलकर आ रहा है

शहर के पंपों पर जो पेट्रोल मिल रहा है, उसमें 20 प्रतिशत एथेनाल मिलकर आ रहा है। इस पेट्रोल के कारण पुराने वाहनों में कई तरह की समस्या भी आ रही है। शहर के लोगों में यह भ्रम है कि कुछ ही पेट्रोल पंपों पर यह मिश्रित पेट्रोल मिल रहा है तो यह गलत है। यह मिश्रित पेट्रोल शहर के हर पंपों पर है। – विकास गंगवाल, केशरबाग पेट्रोल पंप संचालक

कोई समाधान नहीं है

मेरी शिंदे की छावनी पर आटो पाट्र्स की दुकान है। मेरे पास दिनभर में सबसे अधिक वाहन चालक सिर्फ एथेनाल मिश्रित पेट्रोल से हो रही समस्या को लेकर आ रहे है। इस समस्या को पूरी तरीके से कोई समाधान नहीं है, क्योंकि जब-जब वाहन चालक पेट्रोल भरवाएंगे इस समस्या का सामना हर बार करना पड़ेगा। – इरफान खान, मैकेनिक

टू-स्ट्रोक आइल मिलाने से कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है

वर्ष 2020 से पहले बने वाहनों के लिए एथेनाल मिश्रित पेट्रोल पूरी तरह उपयुक्त नहीं माना जा रहा है। ऐसे वाहनों के इंजन पुराने तकनीकी मानकों पर आधारित होते हैं, जिनमें एथेनाल के कारण रबर पाइप, सील और फ्यूल लाइन जल्दी खराब हो सकती हैं। यदि मजबूरी में एथेनाल मिश्रित पेट्रोल भरवाना पड़े तो पेट्रोल के साथ निर्धारित मात्रा में टू-स्ट्रोक तेल मिलाने से फ्यूल सिस्टम को कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है। इससे इंजन की स्मूदनेस बनी रहती है और जंग लगने का खतरा कम होता है। हालांकि, वाहन मालिकों को किसी भी उपाय से पहले मैकेनिक की सलाह जरूर लेनी चाहिए। – टीटू धवन, ऑटो मोबाइल एक्सपर्ट, दिल्ली



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