पश्चिम एशिया तनाव से ग्वालियर में ड्राईफ्रूट महंगे हुए, ईरानी मेवों की सप्लाई प्रभावित होने से बादाम, पिस्ता, केसर के दाम बढ़े, उपभोक्ता और व्यापारी द …और पढ़ें

HighLights
- ईरान से सप्लाई रुकने से ड्राईफ्रूट बाजार में संकट बढ़ा
- मामरा बादाम, पिस्ता और केसर के दाम तेजी से बढ़े
- शादी सीजन में बढ़ती कीमतों से ग्राहकों ने खरीदारी घटाई
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने ड्राईफ्रूट बाजार की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
खासतौर पर ईरान से आने वाले प्रीमियम मेवे जैसे मामरा बादाम, पिस्ता और केसर की आवक रुकने से इनके दामों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। शादी सीजन के बीच बढ़ती कीमतों ने न सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ाया है, बल्कि हलवाई, होटल संचालक और व्यापारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
ईरानी ड्राईफ्रूट्स की सप्लाई पर असर
युद्ध के चलते ईरान से आने वाले सूखे मेवों की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। इसका सीधा असर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर पड़ा है। मामरा बादाम, पिस्ता और केसर जैसे उत्पादों की कमी से बाजार में असंतुलन की स्थिति बन गई है।
कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक उछाल
मामरा बादाम पहले 3200 से 3400 रुपये प्रति किलो बिकता था। अब 3800 से 4000 रुपये तक पहुंच गया है। पिस्ता के दामों में 300 से 500 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। नमकीन पिस्ता 1500 से 1800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि सादा पिस्ता 2300 रुपये तक पहुंच गया है। केसर की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। पहले 2.15 लाख रुपये प्रति किलो बिकने वाला केसर अब 2.65 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
खजूर, काजू और मखाने में स्थिरता
राहत की बात यह है कि ओमान और सऊदी अरब से आने वाले खजूर और किशमिश पर अभी ज्यादा असर नहीं पड़ा है। वहीं काजू और मखाना भारतीय उत्पादन होने के कारण इनके दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।
आम उपभोक्ता और कारोबारियों पर असर
ड्राईफ्रूट्स की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। शादी सीजन में मांग अधिक होने के बावजूद लोग खरीदारी में कटौती कर रहे हैं। इसका असर हलवाइयों और होटल व्यवसायियों पर भी पड़ा है, जिनकी लागत बढ़ गई है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम
व्यापारियों के अनुसार, भारत में सूखे मेवों की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ईरान और अफगानिस्तान से आता है। युद्ध के कारण समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं, जिससे बीमा प्रीमियम और फ्रेट चार्ज बढ़ गए हैं। सीमित स्टॉक के चलते व्यापारी ऊंचे दामों पर बिक्री कर रहे हैं।
आगे और बढ़ सकती है समस्या
व्यापारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो स्टॉक खत्म होने के बाद कीमतों में और उछाल आ सकता है। इससे बाजार में संकट और गहराने की आशंका है।
