ग्वालियर में पारिवारिक सदमे और अकेलेपन से डिप्रेशन में आए भाई-बहनों ने सागरताल में छलांग लगाई। समीर की मौत हुई, पुलिस को घर से जले हुए रुपये भी मिले। …और पढ़ें

HighLights
- भाई की मौत के बाद तीनों ने आत्महत्या की कोशिश
- समीर की डूबने से मौत, बहन और भाई बचे
- घर से पुलिस को जले हुए नोट बरामद हुए
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आपागंज में रहने वाले रहीश खान की मौत के बाद उसके छोटे भाई समीर उर्फ सोनू खान, बहन सायना उर्फ बानो और इदरीश ने सागरताल में छलांग लगा दी थी, जिसमें समीर की भी पानी में डूबने से मौत हो गई थी। रहीश और समीर के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को पुलिस ने कराया। इसके बाद पुलिस ने ही दोनों के शव को सिकंदर कंपू स्थित कब्रिस्तान में दफन कराया, क्योंकि उसके भाई-बहन की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं थी, वह सिपुर्द-ए-खाक करा सके।
पुलिस ने घर की भी तलाशी ली, जिसमें जले हुए नोट मिले। तब सामने आया कि रहीश की मौत के बाद तीनों भाई बहन ने आत्महत्या करने की तैयारी कर ली थी। पिता के रिटायरमेंट के समय मिले रुपये में से करीब पांच लाख रुपये इनके पास थे। इसमें से कुछ नोट तो वह थे, जो बंद हो चुके हैं। इन्हें समीर ने यह कहकर जला दिया था कि यह पैसा अब किस काम का है, इसलिए इसे जला देते हैं। रुपये जलाने के बाद ही तीनों सागरताल के लिए निकले।
भाइयों का शव देख बोले- हम भी जल्दी आएंगे
पुलिस इन दोनों पर निगाह रख रही है। भाइयों का शव जब देखा तो बोले कि हम भी जल्दी तुम्हारे पास आएंगे। इसलिए पुलिस इन्हें किसी संस्था की देखरेख में भी पहुंचाने के लिए प्रयास कर रही है।
अकेलेपन ने गहरे तनाव में धकेला, इलाज के लिए पहल
- अब इस परिवार में सिर्फ इदरीश, बहन सायना उर्फ बानो ही रह गए हैं। पुलिस ने आसपास रहने वाले लोगों से पूछा तो पता लगा कि इन चारों के पिता अब्दुल रशीद महाराज बाड़ा स्थित शासकीय प्रेस में काम करते थे। यहां से सेवानिवृत्त हुए थे। मां की मौत के बाद बहन फिरदौस की शादी हुई थी। फिरदौस और उसके 12 वर्षीय बेटे की मौत हो गई थी। फिर अब्दुल रशीद का भी निधन हो गया।
- समीर को अब्दुल रसीद के निधन के बाद पेंशन मिलती थी। सायना की शादी नहीं हुई। रहीश की घर में ही दो दिन पहले मौत हो गई थी। आसपास के लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। इसके चलते रुपये जलाने के बाद तीनों भाई बहन सागरताल में कूदने चले गए। पुलिस ने जब चिकित्सकों से बात की तो सामने आया कि यह मानसिक रोगी नहीं हैं। यह गहरे डिप्रेशन में चले गए हैं, इसलिए सामान्य बातचीत करते हुए कभी भी कुछ हरकत करना शुरू कर देते हैं।
