इंदौर के मानपुर में आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस जुआकांड अब एक नया मोड़ आ गया है। यह मामला पुलिस कार्रवाई के दायरे से बाहर निकलकर अब सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर जुआ पकड़े जाने के मामले में निलंबित किए गए थाना प्रभारी (टीआई) लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने अदालत में याचिका दायर की है। टीआई का दावा है कि उन्हें नियम सम्मत कार्रवाई करने की सजा दी गई है। उन्होंने अपनी याचिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उन पर एफआईआर में घटना स्थल का नाम बदलने और सही नाम बदलने के साथ वास्तविक तथ्यों को छिपाने के लिए भारी दबाव बनाया गया था, जिसे मानने से इनकार करने पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

गुरुवार को इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई, जहां शासन की ओर से जवाब पेश किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव गृह विभाग, डीजीपी, आईजी ग्रामीण, एसपी ग्रामीण, अतिरिक्त एसपी और एसडीओपी को पक्षकार बनाया है और उनसे इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता टीआई हिहोरे ने आरोप लगाया है कि उनके विरुद्ध की गई निलंबन की कार्रवाई पूरी तरह से वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभाव में आकर की गई है और यह प्रशासनिक शक्तियों के खुले दुरुपयोग का उदाहरण है। अब इस कानूनी लड़ाई की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

टीआई बोले एफआईआर में बदलाव न करने पर गिरी गाज

याचिका में टीआई ने विस्तार से बताया है कि उन पर लगातार यह दबाव डाला जा रहा था कि वे एफआईआर से फार्महाउस का नाम हटा दें और जुआ पकड़े जाने का स्थान बदल दें। जब उन्होंने कानून के दायरे में रहकर सही तथ्य दर्ज किए, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई। टीआई ने यह भी सवाल उठाया कि जांच का जिम्मा ऐसे अधिकारी को सौंपा गया है जो सीधे उन वरिष्ठों के अधीन हैं जिन्होंने मुझ पर यह कार्रवाई की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एएसआई रेशम गिरवाल के निलंबन पर भी हैरानी जताई, जो घटना के समय बीमारी की छुट्टी पर थीं और ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं थीं।

टीआई अनजान थे आईएएस के फार्महाउस से

लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने अपनी याचिका में यह साफ किया है कि जब उन्होंने मानपुर स्थित फार्महाउस पर दबिश दी थी, तब उन्हें इस बात की जरा भी जानकारी नहीं थी कि यह संपत्ति आईएएस वंदना वैद्य की है। जैसे ही यह तथ्य उजागर हुआ, उनके पास फोन कॉल्स और संदेशों के जरिए दबाव बनाने का सिलसिला शुरू हो गया। गौरतलब है कि 10 और 11 मार्च की दरमियानी रात हुई इस कार्रवाई के बाद एसपी यांगचेन डोलकर भाटिया ने टीआई सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। अब 1 अप्रैल की सुनवाई इस जुआकांड में बेहद निर्णायक मानी जा रही है क्योंकि पहली बार किसी अधिकारी ने विभाग के भीतर के दबाव को सार्वजनिक किया है।

इस पूरे कानूनी घटनाक्रम पर टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे की वकील मिनी रवीन्द्रन ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि प्रकरण वर्तमान में माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होनी है। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि मामला कोर्ट में होने के कारण सुनवाई से पहले किसी भी प्रकार की विस्तृत टिप्पणी या गोपनीय जानकारी साझा करना उचित नहीं होगा। सभी पक्ष अब कोर्ट में ही अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे।



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