दरअसल, फरियादी दीपक सिंह के पिता उमेश प्रसाद, 13वीं बटालियन विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) कम्पू में कार्यरत थे। उनकी सेवा के दौरान दो नवंबर 2019 को मृत्यु …और पढ़ें

HighLights
- अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं, एक विशेष राहत है: हाईकोर्ट।
- पुलिस विभाग में नौकरी पाने को दायर युवक की याचिका खारिज।
- बेंच ने कहा- नौकरी के लिए रिकार्ड, आचरण भी सही होना जरूरी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने साफ किया है कि पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए केवल पारिवारिक संकट ही नहीं, चरित्र और आचरण भी बेदाग होना जरूरी है। अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं, यह एक विशेष राहत है।
इसका उद्देश्य परिवार को आर्थिक संकट से उबारना है, न कि ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना, जिसका रिकार्ड पुलिस विभाग की गरिमा के अनुरूप न हो। इन कारणों से हाईकोर्ट ने रिट अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें अनुकंपा नियुक्ति से इन्कार किया गया था।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति अनिल वर्मा की युगलपीठ ने दीपक सिंह गौतम बनाम राज्य शासन मामले में गुरुवार को कहा कि नैतिक अधोपतन से जुड़े मामलों में नाम आने वाले व्यक्ति को पुलिस सेवा में नियुक्त नहीं किया जा सकता।
दुष्कर्म पीड़िता का पुलिस अधिकारियों ने उड़ाया था मजाक, अब डीएसपी और थाना प्रभारी पर होगा एक्शन
दरअसल, फरियादी दीपक सिंह के पिता उमेश प्रसाद, 13वीं बटालियन विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) कम्पू में कार्यरत थे। उनकी सेवा के दौरान दो नवंबर 2019 को मृत्यु हो गई थी। इसके बाद दीपक ने पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
जांच के दौरान सामने आया कि दीपक सिंह के खिलाफ 2017 और 2018 में दो आपराधिक मामले दर्ज थे। एक मामला मारपीट से जुड़ा था, जबकि दूसरा महिला से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित था। हालांकि बाद में वह दोनों मामलों में बरी हो गया, लेकिन यह बरी होना गवाहों के पलटने के कारण हुआ।
स्क्रीनिंग कमेटी ने माना कि महिला सुरक्षा से जुड़े आरोप पुलिस सेवा के मूल दायित्वों के विपरीत हैं। यह भी पाया गया कि आवेदन के समय एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई गई थी, जिससे उम्मीदवार के आचरण पर सवाल उठे।
